पटना, जनवरी 15 -- राज्य में अप्रैल से नवंबर 2025 तक दो लाख 18 हजार 540 टीबी मरीजों की पहचान की गयी है। इस दौरान कुल मरीजों का 58 प्रतिशत की पहचान निजी क्षेत्र से हुए हैं। शेष 42 प्रतिशत की पहचान सरकारी चिकित्सकों की ओर से हुई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल से नवंबर तक के जारी आंकड़ों के अनुसार रैंकिंग में वैशाली प्रथम तथा बक्सर और कटिहार क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है। विभाग के पदाधिकारी बताते हैं कि पटना और गया जैसे बड़े जिलों में निजी डॉक्टरों ने मिसिंग केस को खोजने में बड़ी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई कदम उठा रही है। इसी क्रम में अधिक-से-अधिक संदिग्ध मरीजों को चिह्नित करना, टीबी के साथ एचआईवी संक्रमण वाले मरीजों की चिह्नित कर उन्हें चिकित्सीय उपचार से जोड़ना तथा ...