आठवीं मोहर्रम को मुस्लिम समाज कर्बला के अलमदार हजरत अब्बास के गम में डूबा रहा। चारों तरफ 'या सकीना, या अब्बास' और 'या हुसैन' की गूंज रही।
वाराणसी, जून 25 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। आठवीं मोहर्रम को मुस्लिम समाज कर्बला के अलमदार हजरत अब्बास के गम में डूबा रहा। चारों तरफ 'या सकीना, या अब्बास' और 'या हुसैन' की गूंज रही। इस दौरान दालमंडी, अर्दली बाजार और दोषीपुरा में जुलूस निकले। जुल्म की सल्तनत को, मिटाने हुसैन आए, सिर कटा दिया लेकिन, सजदा में झुकने पाए... जैसे बोल पर लोग आंसू नहीं रोक पाए। गुरुवार को शहरभर के इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर ताजिए रखे जाएंगे। वहीं दिन में 3 बजे हड़हा सराय से हजरत अली असगर के झूले का ऐतिहासिक जुलूस निकलेगा। चाहमामा स्थित ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के नेतृत्व में रात 8:30 बजे तुर्बत और अलम का जुलूस निकला। अब्बास मुर्तजा शम्सी ने मौला अब्बास की शहादत का मंजर बयां किया। यह भी पढ़ें- चांदू मियां के ताजिये की जियारत को उ...
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