नई दिल्ली, सितम्बर 24 -- नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता आज के समय में लोगों को वरिष्ठता बोध से बचना चाहिए। वरिष्ठता बोध शारीरिक से ज्यादा मानसिक विकास पर निर्भर करता है। उक्त बातें बुधवार को लक्ष्मीबाई कॉलेज में आयेजित विकासशील देशों में वृद्धों की देखभाल, @2047: सम्मानजनक जीवन के लिए नीतियां और कार्यक्रम विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी उद्धाटन अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो.अरविंद जोशी ने कही। उन्होंने कहा कि आज हमें वरिष्ठ लोगों के अधिकारों को बचाने की जरूरत है। इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता स्वामी मिथलेश नंदनी शरण ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों के समूचे योगदान को ध्यान में रखते हुए उनका सम्मान करना चाहिए। आज के दौर की जरूरत है परिवारिक सामंजस्य। परिवार का उपस्थित रहना किसी भी विकसित समाज की आधार भूमि है,विषय रखते कहा की हमें वृद्...
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