मधुबनी, मई 16 -- शंभू नाथ ठाकुर मधुबनी। धर्म ग्रंथों के अनुसार ग्रह नक्षत्रों के आधार पर हर तीन साल के बाद एक बार पुरुषोत्तम मास (मलमास) आता है। इसे अधिक मास भी कहते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस मास में अमावस्या से अमावस्या के बीच में कोई संक्रांति न पड़े उसे अधिक मास कहते हैं। संक्रांति का अर्थ सूर्य का राशि परिवर्तन से है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को ही संक्रांति कहते है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार एक सौर वर्ष 365 दिन 6 घंटे 11 मिनट का होता है तथा चंद्र वर्ष 354 दिन 9 घंटे का माना जाता है। यह भी पढ़ें- आज से शुरु हो रहा अधिक मास, 15 जून को होगा समाप्त दोनो के बीच 11 दिन का अन्तर रहता हैं सौर वर्ष और चंद्र वर्ष की गणना को बराबर करने के लिए अधिक मास की उत्पत्ति हुई। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास ज्येष्ठ मास में प्रथम ज्येष्ठ म...