गया, अक्टूबर 3 -- त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध में आश्विन कृष्णपक्ष की नवमी तिथि को लेकर रविवार को सीताकुंड और रामगया तीर्थ पर पिंडदान का विधान है। विष्णुपद मंदिर के सामने पूर्वी तट पर स्थित सीताकुंड और रामगया वेदियों पर श्राद्ध करने से पितरों को अक्षयलोक की प्राप्ति होती है। सीताकुंड में सौभागती महिला द्वारा बालू के पिंड से पिंडदान का विधान है। साथ ही सौभाग्य पिटारी दान करने का महत्व है। माता सीता ने जहां श्राद्ध किया वह स्थल सीताकुंड है। यहां सौभाग्य स्त्री बायें हाथ से बालू के तीन पिंड देने के बाद सौभाग्य पिटारी दान करती हैं, जहां पर श्रीराम ने श्राद्ध किया वह रामगया तीर्थ से प्रसिद्ध है। श्राद्ध स्थल पर भरत जी का आगमन हुआ था वह स्थल भरताश्रम नमस्कार वेदी है। यहां पहले श्रीराम और फिर भरत जी को नमन करने का विधान है。 यह भी पढ़ें- पितृपक्ष : छह...