जमुई, अप्रैल 15 -- झाझा । निज प्रतिनिधि सतुआन पूजा और परंपराएं आज भी कायम है,भले ही इसमें कुछ कमी आई है। सतुआन के दिन लोग सुबह स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद सत्तू और जल का दान किया जाता है।कई स्थानों पर लोग नदी या तालाब में स्नान करते हैं और ब्राह्मणों तथा जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है और लोग श्रद्धा के साथ सरल पूजा-पाठ करते हैं। आम का पत्ता, कच्चे आम, प्याज और हरी मिर्च का सेवन किया जाता है। सत्तू शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा देने वाला आहार है, जो गर्मी के मौसम के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।सतुआन यह भी पढ़ें- सतुआनी पर्व पर श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान, पूजा-अर्चना पर्व की कथालोककथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में एक गरीब ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे, जो अत्यंत ध...