बिजनौर, अगस्त 11 -- अगस्त 1942 में जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशभर में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की ज्वाला धधक रही थी, तब उसकी तपिश धामपुर तक भी पहुंची। आज से 84 वर्ष पूर्व धामपुर की धरती पर चौधरी कुलमणि सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ऐसी सिंह गर्जना की थी, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों के दिलों में रही। यह भी पढ़ें- जरा याद करो कुर्बानीचौधरी कुलमणि सिंह की भूमिका उस समय चौधरी कुलमणि सिंह अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे और फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में अदालत द्वारा सुनाई गई सजा काटकर बाहर आए थे। 12 अगस्त 1942 की उस सुबह धामपुर की गलियों में रोज की अपेक्षा कुछ अलग हलचल थी। भोर में लोग टहलकर अपने घरों को लौट रहे थे। आसपास के गांवों से लोग घरेलू उपयोग के लिए रोजमर्रा का सामान लेकर शहर में पहुंच र...