हमीरपुर, अगस्त 13 -- हमीरपुर, संवाददाता। बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाकर उसे सफल बनाने के लिए दीवान शत्रुघ्न सिंह को बुंदेलखंड केसरी उपाधि से अलंकृत किया गया। 1952 में संत विनोबा भावे को अपना गांव मंगरौठ दान में देने वाले दीवान साहब ने कई बार जेल की यात्राएं की। सालों साल नजरबंद रहे, लेकिन आजादी के आंदोलन से पीछे नहीं हटे। कालान्तर में उनकी सादगी एवं नि:स्वार्थ सेवा के कारण प्यार से लोग उन्हें बुंदेलखंड गांधी कहा करते थे। दीवान साहब ने अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ मंगरौठ गांव में ही 'भारतीय चंद्रहास' क्रांतिकारी संगठन बनाया। साथ ही समाज की कुरीतियों को रोकने के लिए 'कुरीति निवारिणी सभा' का गठन किया। मंगरौठ में शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों का प्रवास रहा। दीवान साहब का विवाह गाजीपुर (फतेहपुर) क...