सीवान, अगस्त 14 -- महाराजगंज। जब पूरा देश महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा था और अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रहा था। उस समय पुराने सारण जिले के अब सीवान जिले के महाराजगंज में एक नौजवान जिसका नाम था उमाशंकर प्रसाद अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हो गया था। अंग्रेजी हुकूमत के विरोध के बावजूद मात्र 28 वर्ष की उम्र में सन 1931 में महाराजगंज शहर के बीचो-बीच अपने निजी भूमि पर अपने निजी कोष से उमाशंकर प्रसाद हाई स्कूल की स्थापना कर विद्यालय के माध्यम से बच्चों में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ने का उमाशंकर प्रसाद पढ़ाई कराने लगे। यह भी पढ़ें- आजादी के दीवाने उमाशंकर प्रसाद को लोग भुला नहीं पातेउमाशंकर प्रसाद की सक्रियता उमाशंकर प्रसाद की सक्रियता...