आचार्य शुक्ल ने हिंदी के इतिहास को दिया तार्किक आधार
वाराणसी, अक्टूबर 4 -- वाराणसी। आचार्य रामचंद्र शुक्ल की प्रासंगिकता इस बात में है कि उन्होंने हिंदी आलोचना और इतिहास लेखन को एक वैज्ञानिक, तार्किक और वस्तुनिष्ठ आधार दिया है। यह विचार उनकी 142वीं जयंती पर रविवार को रवीन्द्रपुरी स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान में हुए आयोजन में सामने आया। इस मौके पर डॉ. मुक्ता की कहानियों का बांग्ला अनुवाद 'निर्वाचित गल्प' का विमोचन भी हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि आचार्य शुक्ल के अनुसार साहित्य का उद्देश्य समाज के लोकमंगल की भावना का पोषण करना है। अध्यक्षीय संबोधन में जेएनयू के प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि शुक्लजी का लिखा 'हिंदी साहित्य का इतिहास' अब भी सबसे प्रामाणिक माना जाता है। यह भी पढ़ें- लेखकों ने किया नागरी प्रचारिणी सभा का भ्रमण प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि उन्होंन...
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