देवरिया, अप्रैल 7 -- बरहज(देवरिया), हिन्दुस्तान टीम। आग के कहर से तबाह हुए तमाम किसान ऐसे हैं, जिनके गांव में उनकी व्यथा पूछने अभी तक न अफसर पहुंचे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। ऐसे किसान सरकारी सर्वे को भी सिर्फ खानापूर्ति मानते हैं। उनका कहना है कि जब कोई आया ही नहीं, कोई जानकारी ही नहीं ली तो फिर किस बात का सर्वे और कैसा सर्वे। यह पीड़ा तहसील क्षेत्र के धनौती और भुलईपुर के अग्नि प्रभावित किसानों की है। किसान बोलेकितना नुकसान हुआ जब कोई पूछे तब तो बताएं। न अधिकारी पूछने आ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। आखिर अपना दर्द किसे बताएं। सुनाई पड़ता है कि लिखा-पढ़ी हो रही है। मगर कहां हो रही है, कौन कर रहा है, कुछ नहीं पता।रमाशंकर यादव किसान धनौतीसुनने में आया है कि तहसील से लेखपाल आये थे, लेकिन हम लोगों से नहीं मिले। दो बीघा गेहूं की फसल जल गई है। पता...