बस्ती, नवम्बर 21 -- बस्ती, निज संवादाता। दुबौलिया थानाक्षेत्र के बैरागल गांव की कांती देवी के जीवन में विगत पांच वर्षों से अंधेरा ही अंधेरा था। दोनों पैर लकवाग्रस्त, पति प्रहलाद की मौत के बाद ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। पैतृक संपत्ति का एक टुकड़ा भी नसीब नहीं हुआ। मजबूरन गांव से कुछ दूर सैनिया चौराहे के पास एक झोपड़ी बनाकर कांती देवी अपनी दो बेटियों के साथ रहने लगीं। दिनभर बेटियां मजदूरी करतीं, शाम को जैसे-तैसे चूल्हा जलता। गरीबी ने उन्हें इस कदर जकड़ रखा था कि दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब होती थी। इसी बीच बड़ी बेटी की शादी तय हो गई। मां की आंखों में आंसू और बेटी के चेहरे पर मजबूरी साफ दिख रही थी। कई चौखटों पर दौड़ी लेकिन किसी ने मदद नहीं की। लेकिन कहते हैं न कि जब इंसान का कोई नहीं होता, तब भगवान साथ खड़ा होता है। भगवान के रू...