नई दिल्ली, फरवरी 24 -- नीरज शर्मा, आगरा। शहरवासियों की सेहत के साथ जलकल विभाग सीधे तौर पर खिलवाड़ कर रहा है। कहने को तो विभाग हर दिन 400 नमूनों की जांच का दावा करता है, लेकिन हकीकत यह है कि शहर की गलियों में आज भी नलों से बदबूदार और मटमैला पानी टपक रहा है। करोड़ों रुपये के बजट और 'जल मित्र' जैसी नई योजनाओं के बावजूद, विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही और खानापूर्ति के रवैये ने शहर की प्यास को जोखिम में डाल दिया है। आलम यह है कि 100 साल पुराना हो चुका पाइपलाइन नेटवर्क अब जवाब दे चुका है, लेकिन सिस्टम की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। शहर कई इलाके ऐसे हैं जहां लोगों को पहले करीब 15 मिनट तक पानी बहाना पड़ता है उसके बाद साफ पानी आता है। शहर में सबसे स्थिति खराब पुराने इलाकों में हैं। यहां पानी की पाइप लाइनें नालों और सीवर लाइनों के किनारे से जा ...