हजारीबाग, मार्च 23 -- कटकमसांडी। प्रतिनिधि कटकमसांडी प्रखंड की वादियां इन दिनों लाल और नारंगी रंगों से सराबोर हो उठी हैं। जंगलों और गांवों के किनारे खड़े सेमल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ चटक फूलों से लद गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सेमल का पेड़ वर्षों से गांवों की पहचान रहा है। पहले लोग इसके फल से निकलने वाली रुई से तकिए और गद्दे बनाते थे। विशेषज्ञ बताते हैं कि सेमल केवल उपयोगी ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा यह वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकने और आसपास के वातावरण को शुद्ध रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।आयुर्वेदाचार्य सह पतंजलि योग समिति के प्रभारी अजीत कुमार बताते हैं कि सेमल का पंचांग फूल, फल, छाल, पत्ता और जड़ औषधीय दृष्टि से काफी उपयोगी होता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग शरीर की कमजोरी, रक्त विकार और बवासीर ज...