आईबीडी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी: डॉ. चंदन
रांची, मई 18 -- रांची, वरीय संवाददाता। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. चंदन कुमार यादव ने बदलती जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी के कारण पेट की बीमारियों के बढ़ते ग्राफ पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (आईबीडी) के बढ़ते मामलों पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉ. यादव ने बताया कि आईबीडी मुख्य रूप से पाचन तंत्र की पुरानी सूजन की बीमारी है, जिसमें अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग शामिल हैं। पेट दर्द, ऐंठन, दस्त, मल के साथ खून आना, वजन गिरना और अत्यधिक थकान इसके मुख्य लक्षण हैं।उन्होंने आगाह किया कि इसे सामान्य खराबी या पाइल्स समझकर घरेलू उपचार करने से बीमारी गंभीर हो जाती है और आंतों को बड़ा नुकसान पहुंचता है। इसके सटीक कारणों में आनुवंशिकी, कमजोर इम्यून सिस्टम और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.