प्रयागराज, जून 5 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग) और धारा 420 (धोखाधड़ी) को एक ही मामले में एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय ने संदेश चंद्र खार्द उर्फ संदेश चंद्र गुप्ता एवं अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके विरुद्ध जारी संज्ञान एवं सम्मन आदेशों को रद्द कर दिया। झांसी के प्रेमनगर थाने में याचियों के खिलाफ धारा 406 और 420 आईपीसी के तहत कार्यवाही चल रही थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली रेस क्लब बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में स्पष्ट किया है कि आपराधिक न्यासभंग और धोखाधड़ी के अपराध प्रकृति में अलग-अलग हैं तथा दोनों एक साथ अस्तित्व में नहीं रह ...