मुजफ्फरपुर, मार्च 9 -- मुजफ्फरपुर। शतरंज की बिसात पर महज मोहरे नहीं, बल्कि सपने सजाए जिले के मेधावी असुविधाओं से मात खा रहे हैं। खेलने के लिए संसाधनयुक्त शांत स्थान न अवसर। रेटिंग में सुधार के लिए तकनीकी प्रशिक्षण देने वाला मार्गदर्शक न सरकारी मदद। बावजूद अपने बूते कमाल कर रहे खिलाड़ियों ने जिला ही नहीं, राज्य का नाम रोशन करने में खुद को झोंक रखा है। इनका कहना है कि आईपीएल की तर्ज पर जिले में एक प्लेटफॉर्म तैयार हो, ताकि ये खुद को निखार सकें। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आर्थिक मदद और उपकरण उपलब्ध हों तो ये हर बाज़ी जीत सकते हैं। मुजफ्फरपुर में शतरंज के खिलाड़ियों की संख्या और प्रतिभा दोनों तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आधुनिक प्रशिक्षण संसाधनों और आर्थिक सहायता की कमी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। खिलाड़ियों का कहना है कि यद...
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