नई दिल्ली, मई 4 -- अदालत ने सोमवार को एक कंपनी के तीन पूर्व अधिकारियों को इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (आईडीबीआई) को धोखा देने के मामले में चार साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि बेवजह की हमदर्दी न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी। विशेष जज सुधांशु कौशिक की अदालत ने सजा पर दलीलें सुनी। इससे पहले 24 अप्रैल को निजी कंपनी के पूर्व अधिकारियों 64 वर्षीय सुमित चतुर्वेदी, 67 वर्षीय अमित चतुर्वेदी व 66 वर्षीय परवीन जुनेजा को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने व जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि यह साबित हो गया है कि दोषियों ने वर्ष 2009 में आईडीबीआई को धोखा देने के लिए एक आपराधिक साजिश रची। इसी साजिश की आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जाली दस्तावेजों के आधार 9 लाख 75 हजार कोड़ रुपये का ऋण मं...