लखनऊ, अप्रैल 14 -- भारत रत्न डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर मंगलवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से प्रदेश भर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संघर्ष समिति ने कहा कि डा. आंबेडकर का स्पष्ट मत था कि बिजली एक बुनियादी आवश्यकता है और इसे सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने 1940 के दशक में ही स्टेट सोशलिज्म के तहत बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में रखने और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत ग्रिड प्रणाली विकसित करने की वकालत की थी, ताकि देश का तीव्र औद्योगिक और आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने 1950 में संविधान बनाने के पहले इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एक्ट 1948 बनाया, जिसके तहत पूरे देश में राज्य विद्युत परिषदों का गठन किया गया और बिजली को निजी क्षेत्र से वापस लेकर सा...
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