रांची, अगस्त 14 -- रांची। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि देश को भौगोलिक स्वतंत्रता तो मिल गई है, लेकिन मन और संस्कारों के स्तर पर पूर्ण स्वतंत्रता पाना अभी बाकी है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार मनुष्य को भीतर से पराधीन बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि परमपिता परमात्मा के बताए मार्ग अनुसार 'स्व' को पहचानना, उसका सम्मान करना और आत्मा के मूल गुणों-ज्ञान, पवित्रता व शांति को जाग्रत रखना ही मानसिक स्वतंत्रता का मार्ग है। जब हम इन गुणों के प्रति सजग रहते हैं, तो आंतरिक विकार समाप्त होने लगते हैं। अपने भीतर की बुराइयों और विकारों पर विजय प्राप्त करना ही वास्तव में सच्ची स्वतंत्रता है।

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