उन्नाव, मार्च 19 -- सुमेरपुर। औद्योगिकीकरण और रसायनों के बढ़ते अंधाधुंध प्रयोग ने हमारी सबसे प्रिय पड़ोसी घरेलू गौरैया को अस्तित्व के संकट में डाल दिया है। विश्व गौरैया दिवस क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों और संरक्षणकर्मियों ने इस नन्हीं जान को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने पर जोर दिया है। लुप्त होते 'बिन बुलाए मेहमान'संरक्षणकर्मी दुर्गेश सिंह ने गौरैया की बदलती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि एक समय था जब घरों के आंगन गौरैया की चहचहाहट से गूंजते थे। ये बिन बुलाए मेहमान हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा थे, लेकिन आज इनका दिखना दुर्लभ और रहस्यपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समाज अब भी जागरूक नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियां इस पक्षी को केवल किताबों में ही देख पाएंगी।वापसी का रास्ता: हरियाली और सुरक्षित...