मेरठ, मार्च 9 -- हस्तिनापुर स्थित कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 30 वें दिन भगवान आदिनाथ का स्वर्ण कलश अभिषेक व शांतिधारा की गई। सोमवार को विधान में 82 परिवारों ने भाग लिया। मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज का मानव केवल पैसे का उपासक बना हुआ है। परंतु यह क्षणिक सुख है। केवल अहिंसा और मेहनत से कमाया हुआ धन सुखमय होता और इसी के साथ भगवान की भक्ति कर मोक्ष का रास्ता प्रशस्त होता है। कहा कि धर्म का मूल आधार संयम है। जीवन में व्रत और नियमों का पालन ही वास्तविक सुख की ओर ले जाता है। विधान मात्र एक क्रिया नहीं, बल्कि अंतरात्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग है। बिना भाव के की गई पूजा फलदायी नहीं होती। भगवान का अभिषेक शनि जैन व शांतिधारा मुनेंद्र जैन ने की। आरती का दीप सरिता जैन ने प्रज्व...