नई दिल्ली, जुलाई 14 -- गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के 38 आतंकियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस सजा को सही ठहराने के लिए 'बहुत बड़ी' साजिश, बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की मंशा और बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने को मुख्य वजह बताया। जस्टिस ए. वाई. कोगजे और समीर दवे की पीठ ने 7 जुलाई के अपने फैसले में 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा। कोर्ट ने माना कि गुजरात और केरल में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में उनकी भूमिका और साजिश में लॉजिस्टिकल मदद देने की बात साबित हो चुकी है। इस आदेश की कॉपी सोमवार को उपलब्ध कराई गई। 26 जुलाई 2008 को, 70 मिनट के अंदर अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में 21 बम धमाके हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। जिन अ...