कुशीनगर, मई 4 -- कुशीनगर, हिन्दुस्तान टीम। क्षेत्र के धुनवलिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृन्दावन धाम से पधारे कथावाचक आचार्य राजेश शास्त्री ने रविवार को राजा परीक्षित के श्राप की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।आचार्य शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक प्राणी की मृत्यु सप्ताह के सात दिनों के भीतर ही निश्चित है, अर्थात सोमवार से रविवार के बीच ही जीवन का अंत होता है। इसके बावजूद मनुष्य अहंकार के वशीभूत होकर बड़े से बड़े अपराध करने से भी नहीं हिचकता और यह मानकर चलता है कि उसका शरीर सदा वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने इसे मानव जीवन की सबसे बड़ी भूल बताया। यह भी पढ़ें- कुंती ने श्रीकृष्ण से मांगा था विपत्ति का वरदान : गंगोत्री तिवारी उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकार का त्याग कर भगवान वासुदेव की भक्ति एवं सेवा में लगना चाहिए। ऐ...