मधुबनी, अप्रैल 9 -- मदन कुमार झा बेनीपट्टी। जब पृथ्वी पर दुष्टों का भार अधिक होने लगता है तो उसे अंत करने के लिए भगवान कई रूपों में अवतार लेकर उसका अंत करते हैं। भगवान कृष्ण का अवतार भी इसी के लिए हुआ था। जब पृथ्वी पर कंस का अत्याचार बढ़ने लगा तो पृथ्वी माता देवताओं के साथ भगवान से प्रार्थना करती है और फिर देवकी-वासुदेव का विवाह होता है । आकाशवाणी होती है कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का अंत करेगा। उसके बाद कंस का अत्याचार और बढ़ जाता है। अहंकार और भय मनुष्य को क्रूर बना देता है। कंस भी इससे ग्रसित हो देवकी-वासुदेव को कारागार में कैद कर देता है और उनके छह पुत्रों का वध कर देता है। पर होनी को कौन टाल सकता है। फिर अष्टमी तिथि की आधी रात को भगवान कृष्ण का प्राकट्य होता है और उनके हाथों अत्याचारी कंस का अंत होता है। बेनीपट्टी के चैतन्य कुटी में च...