अस्सी घाट पर मंगलवार को सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की काव्य गंगा दिवंगत कवि सिद्धनाथ शर्मा 'सिद्ध' को समर्पित रही।
वाराणसी, जून 17 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। अस्सी घाट पर मंगलवार को सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की काव्य गंगा दिवंगत कवि सिद्धनाथ शर्मा 'सिद्ध' को समर्पित रही। रचनाकारों ने उन्हें काव्यांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के 65वें सत्र में उन्होंने जीवन की क्षण-भंगुरता पर आधारित रचनाएं पढ़ीं। वरिष्ठ रचनाकार पं. दिनेशदत्त पाठक ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया। जीवन की अनिश्चितताएं बखूबी से प्रस्तुत की। कहा-'जीवन जगत में है रुका, ज्यों मुट्ठी बित रेत, कस-कस मुट्ठी बांधता, मानव बना अचेत।' अमित आनंद शर्मा कहा कि ईश्वरीय इच्छा के आगे जीव बेबस है। संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा के संयोजन और जगदीश्वरी चौबे के संचालन में संगीता श्रीवास्तव 'शिवपुरी', विजय कुमार मिश्र 'बुद्धिहीन', डॉ. जयप्रकाश मिश्र, डॉ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव 'प्रकाश मिर्जापुरी', पं. सूर्यकांत त्रिपाठी...
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