नई दिल्ली, जुलाई 7 -- ये उन दिनों की बात है जब मीना कुमारी और कमाल अमरोही की शादीशुदा जिंदगी में दरारें आ चुकी थीं। मीना बहुत अकेली थीं और इस अकेलेपन में उनका सबसे बड़ा सहारा थीं उनकी लिखी नज्में। दुनिया उन्हें एक बेहतरीन अदाकारा के रूप में जानती थी, लेकिन उनके भीतर छिपे शायर से बहुत कम लोग वाकिफ थे।मीना और गुलजार की दोस्ती जब मीना अपनी जिंदगी के सबसे खराब दौर से गुजर रही थीं तब 'बेनजीर' के सेट पर उनकी मुलाकात गुलजार से हुई। गुलजार, जो खुद शब्दों के जादूगर थे, ने मीना के भीतर के उस दर्द और उनकी शायरी के हुनर को पहचान लिया। उन्होंने मीना को और लिखने के लिए प्रेरित किया। बस फिर क्या था, दोनों के बीच शायरी, अदब और जज्बातों का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने मीना के तन्हा दिल को एक नया हौसला दिया।गंभीर बीमारी ने घेरा वक्त आगे बढ़ा, लेकिन मीना ...