उन्नाव, जनवरी 23 -- उन्नाव। जनपद के अस्पतालों में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मेडिकल मशीनें मौजूद हैं, लेकिन डॉक्टर और तकनीशियन की कमी के चलते वे बेकार पड़ी हैं। वेंटिलेटर बंद, अल्ट्रासाउंड मशीनें खामोश, ईसीजी की जांच के लिए मरीज घंटों लाइन में खड़े. गंभीर रूप से घायल और बीमार लोग अब भी निजी अस्पतालों की महंगी सेवा पर निर्भर हैं। 11 साल से रिक्त पद और तैनाती में लापरवाही ने मरीजों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। कोरोना काल में शासन ने मरीजों को चिकित्सकीय सहायता देने के लिए जिला अस्पताल, सरस्वती मेडिकल कॉलेज, मौरावां और बीघापुर के एल-टी श्रेणी के अस्पतालों को अपग्रेड किया था। इसके तहत जनपद में कई करोड़ की लागत से 22 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे, जिनमें से दस जिला अस्पताल के आइसोलेशन यूनिट में रखे गए थे। कोरोना काल के दौरान इन वेंटिलेटरो...