नई दिल्ली, मार्च 18 -- लंबे समय तक कोमा और जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर रहने वाले मरीजों पर जब इलाज असर करना बंद कर देता है तो जीवन अधिक पीड़ादायक बन जाता है। 13 साल से मरणासन्न पड़े गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु' (Passive Euthanasia) का आदेश देकर उनकी पीड़ा का निवारण करने के साथ ही एक नजीर पेश की है। इस नजीर से हरीश के अलावा उसके जैसे अन्य मरीजों और उनके परिजनों की पीड़ा को हरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स अब 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु' के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है। आने वाले समय में देश भर के बड़े अस्पतालों में अंगदान के लिए गठित कमेटी की तर्ज पर 'पैसिव यूथेनेशिया कमेटी' भी बनाई जा सकती है। यह कमेटी तय करेगी कि यदि मरीज का बच पाना संभव नहीं है तो कब और किस तरह...
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