नई दिल्ली, जुलाई 23 -- केंद्र सरकार का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में उसके द्वारा हवाई किराए को नियंत्रित नहीं किया जाता है। असाधारण परिस्थितियों में जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप किया जाता है। मौजूदा नियमों के हिसाब से एयरलाइंस अपने परिचालन खर्च, सेवा की गुणवत्ता और उचित मुनाफे को ध्यान में रखते हुए किराया तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। लोकसभा में लिखित सवाल के जवाब में नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जानकारी दी कि वर्ष 1994 में एयर कॉरपोरेशन एक्ट समाप्त होने के बाद भारतीय विमानन क्षेत्र पूरी तरह उदार (डीरगुलेटेड) हो गया था। इसलिए एयरलाइंस अपनी व्यावसायिक और परिचालन जरूरतों के अनुसार किसी भी रूट पर उड़ान शुरू करने या बंद करने का फैसला कर सकती हैं। इसके साथ ही, देश में घरेलू हवाई किराए (एयरफेयर) पर आम तौर पर सरकार का कोई सरकारी नि...