असहमति को कभी भी लड़ाई में न बदलने दें, उत्तेजना के क्षणों में क्या करें
नई दिल्ली, अक्टूबर 27 -- अहिंसा के कई पक्ष हैं। इसके अंतर्गत विचारों, वचनों या कर्मों के जरिये किसी को भी चोट न पहुंचाना आता है। अहिंसा के कई ऐसे रंग हैं, जिनके बारे में हम कभी सोचते भी नहीं। हम जानते हैं कि हमें किसी को मारना या चोट पहुंचाना नहीं चाहिए, पर जब मन और वचनों से अहिंसा की बात आती है, तो हम काफी लापरवाह होते हैं।बुद्धिमान या हाजिरजवाब दिखाते समय क्या करें हम जानते हैं हमें किसी को गाली नहीं देनी चाहिए। किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। हम दिन में कई बार ऐसी बातें भी कहते हैं, जिनसे हमारा अहंकार बढ़ता है या दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। हम लोगों की कमियां निकालते हैं। उनकी चोट पर नमक छिड़कते हैं। अक्सर हम दूसरों पर कटाक्ष करते हैं, ताकि हम निराले लगें या दूसरों से अधिक बुद्धिमान लगें। हम अपने आपको बुद्धिमान या हाजिरजवाब दि...
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