बागेश्वर, मई 15 -- देवेंद्र पांडे, बागेश्वर। असम के वैज्ञानिकों ने देवकी लघु वाटिका में मूंगा रेशम की खेती का अवलोकन किया गया, वैज्ञानिकों के दल ने सराहना करते हुए उत्तराखंड के लिए इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के लिए भी लाभकारी बताया। दल ने कपकोट का भी भ्रमण कर किसानों को अनेक जानकारी मूंगा रेशम की दी और बताया कि मूंगा रेशम सबसे कीमती होने के साथ ही आसाम का जीआई टैग प्राप्त है। किशन सिंह मलड़ा ने मूंगा रेशम की खेती के बारे में बताया एवं अपनाने की अपील करते हुए सभी मूंगा रेशम से जुड़े किसानों का धन्यवावद किया तथा मूंगा रेशम के साथ हल्दी, कपूर कचरि, अदरक, गडेरी, पिनालु, अरबी प्रजाती, लेमन ग्रास, ऐलोबरा, रोजमैरि आदि संयुक्त फसलों के उत्पादन को आसाम में भी अपनाने की सहमति जताई।बागेश्वर उत्तराखंड मूंगा रेशम के क्षेत्र में उत्तर पूर्व...