देहरादून, मई 8 -- देहरादून,वरिष्ठ संवाददाता। किंकर विचार मिशन के संस्थापक स्वामी मैथिलीशरण ने कहा कि अशुद्ध बुद्धि संत्संग रहित बुद्धि साधक को सुख, शांति और आनंद नहीं दे सकती है। संसार में विकास के बहुत मायने रखता है पर वैज्ञानिक विकास कभी भी व्यक्ति का परम लक्ष्य नहीं हो सकता है। जीवन का चरम लक्ष्य शांति प्राप्त करना ही होता है। शुक्रवार को कॉन्वेन्ट रोड स्थित सिद्धेश्वर राम मंदिर में श्री सनातन धर्म सभा, गीता भवन की ओर से रामचरितमानस प्रवचन के पांचवें दिन रहा। स्वामी मैथिलीशरण ने बुद्धि का कुशाग्र होना और शुद्ध होना दोनों के महत्व भक्तों को समझाए। उन्होंने कहा कि लंका में विकास अधिक है पर हमारा आदर्श अयोध्या का रामराज्य ही है न कि रावण राज्य। रामायण, भागवत पुराणों में कहीं पर भी यह वर्णन नहीं आया कि किसी भक्त ने भगवान से अमरत्त्व या समृ...