अशालीन पहनावे पर नियंत्रण जरूरी
नई दिल्ली, अगस्त 20 -- दिल्ली उच्च न्यायालय में एक वकील ने जब यह तर्क दिया कि 'लड़की ने जींस और टॉप क्यों पहना था?' तो न्यायाधीश ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए साफ-साफ कहा कि किसी महिला के कपड़े उसकी निजी पसंद हैं। वह क्या पहनती है, यह किसी पड़ोसी, समाज, यहां तक कि किसी वकील का भी मामला नहीं बनता है। कपड़े को आधार बनाकर किसी गैर-कानूनी हरकत को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता। यह वाकया उस समय का है, जब उच्च न्यायालय में यौन उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। बचाव पक्ष की ओर से खड़े वकील का यह तर्क था कि लड़की वेस्टर्न टॉप, जींस जैसे भड़काऊ कपड़े पहनती है, जिससे भोले-भाले लड़कों पर गलत असर पड़ता है। अगर कोई लड़की अशालीन दिखने वाले कपड़े पहनकर खुलेआम बाजार में घूमे, तो अवश्य ही समाज को आपत्ति जताने का अधिकार है। आखिर इसका असर दूसरे लोगों ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.