विधि संवाददाता, अप्रैल 28 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए पिक एंड चूज (चुनिंदा कार्रवाई) की नीति पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने ​स्वामी शिव स्वरूपानंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची का आरोप है कि प्राधिकरण ने 23 अवैध निर्माणों की सूची में केवल कुछ ही लोगों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जबकि शेष को छोड़ दिया गया। ​मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण हलफनामा दाखिल करे- कोर्ट कोर्ट ने मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के परामर्श से एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें ​सभी 23 चिह्नित संपत्तियों पर अब तक की ग...