प्रयागराज, अप्रैल 13 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के आधार का उल्लेख न करने और न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए बगैर रिमांड आदेश जारी करने को गंभीरता से लेते हुए मुरादाबाद के एक युवक की हिरासत को अवैध करार दिया है। साथ ही इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुरादाबाद के रिमांड आदेश को रद्द कर दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मोहम्मद आसिफ की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से कोर्ट को बताया कि पुलिस ने याची के गिरफ्तारी मेमो के कॉलम संख्या 13 में गिरफ्तारी के अनिवार्य आधार का उल्लेख नहीं किया। साथ ही मजिस्ट्रेट ने छपे हुए प्रोफार्मा पर रिमांड आदेश किया है, जो न्यायिक विवेक के इस्तेमाल न होने का स्पष्ट प्रमाण है।खंडपीठ ने प्र...