फतेहपुर, जून 25 -- फतेहपुर। कर्बला की जंग में हजरत हुसैन के साथ इंसानियत को बचाने के लिए जिन 71 जानिसारों ने अपनी जान कुर्बान की थी उनमें छह माह के नन्हे सिपाही अली असगर भी शामिल थे। हजरत हुसैन के अबोध पुत्र के पास न तो तीर थे न ही तलवार इसके बावजूद उन्हे शहीद कर दिया गया। मौलाना सैय्यद शोएब जैदी ने बताया कि अली असगर को तीन दिन तक भूखा रखा गया था। भूख और प्यास उनका चेहरा कुम्हला गया था, झूले पर लेटे नन्हे सिपाही अपनी सूखी जुबान होंठों पर फेरते हुए बेजुबानी में प्यास का इजहार कर रहे थे। जिस पर हजरत हुसैन ने उन्हे झूले से गोदी में लेकर यजीदी फौजियों से बेटे को पानी पिलाने की बात कही। यह भी पढ़ें- चरौरा-औरंगाबाद में जुलूस निकाले लेकिन जैसे ही उन्होंने अली असगर के चेहरे से दामन हटाया हुर्मुला नामक दरिन्दे ने तीर मासूम के गले पर मार दिया जिससे...