बांका, जनवरी 6 -- बांका, नगर प्रतिनिधि। ठंड हर साल आती है। शहरों में लोग रजाई-हीटर के बीच सुकून की नींद सो जाते हैं, लेकिन सवाल हर बार वही रह जाता है क्या ये शहर सिर्फ पक्के मकानों में रहने वालों का है या उन लोगों का भी, जो कड़कड़ाती ठंड में कांपते हुए अलाव के सहारे रात काटते हैं? बांका जिले में इन दिनों ठंड ने गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी को और कठिन बना दिया है। न्यूनतम तापमान लगातार 6-8 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में झुग्गी-झोपड़ियों, प्लास्टिक और टीन की अस्थायी छतों के नीचे रहने वाले हजारों लोग ठंड से जंग लड़ रहे हैं। बांका की ठंडी रातों में गरीबों की जिंदगी अलाव की आग जितनी ही अस्थायी है। एक चिंगारी बुझते ही अंधेरा और ठंड फिर हावी हो जाती है। कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि श...
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