लखनऊ, अगस्त 18 -- लखनऊ , कार्यालय संवाददाता कहते हैं सब अहले अजा या हुसैन मौसम-ए-गम खत्म हुआ या हुसैन की सदाओं के बीच हर साल की तरह इस साल भी अंजुमन गुंचाए मजलूमिया की इमामबाड़ा अबुतालिब हसन पुरिया में चल रही सालाना शब्बेदारी का अलविदाई अलम की जियारत के बाद समापन हो गया। अलविदाई जुलूस इमामबाड़ा अबुतालिब से निकल कर शरगा पार्क, मैदान एल एच खां होते हुए पुन इमामबाड़े में आकर समाप्त हुआ।

अलविदाई मजलिस अलविदाई मजलिस को मौलाना यासूब अब्बास ने खिताब करते हुए दामाद ए पयम्बर हजरत अली की अजमत बयान की। मजलिस के बाद शबीहों की जियारत करायी गयी, जिसमें हजरत अब्बास के अलम, ताबूत, हजरत अली असगर का झूला, इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह था, जिसे देखकर अजादारों की सिसकियां बंध गईं। अलविदाई जुलूस में छोटे-छोटे बच्चे या हुसैन लिखे काले झंडे व अलम लिए चल र...