अर्थव्यवस्था पर अल नीनो के अलावा और भी खतरे
नई दिल्ली, अक्टूबर 6 -- दिब्येंदु मैती,सीनियर प्रोफेसर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स अल नीनो ने इस साल फिर से समुद्री धाराओं, मानसूनी हवाओं और देशों के आर्थिक प्रदर्शन के बीच के नाजुक रिश्ते को जगजाहिर किया है। अगस्त-अक्तूबर के दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान करीब 2.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अंदेशा विश्व मौसम विज्ञान संगठन जता चुका है। इसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी भी दी थी कि अल नीनो 'घर के अंदर दाखिल हो चुका है- और गर्मी बढ़ा रहा है'। इससे भुखमरी भी बढ़ सकती है। भारत पर इसका असर तत्काल दिखा है। इस बार जून-सितंबर का मानसून लगभग 12.6 फीसदी कम बरसा और यह 2015 के बाद सबसे सूखा मानसून साबित हुआ है। इतिहास देखें, तो मानसूनी बारिश में हर एक प्रतिशत की कमी से फसल का 'ग्रॉस वैल्यू एडेड ग्रोथ' (कुल उत्...
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