हल्द्वानी, सितम्बर 13 -- हल्द्वानी, संवाददाता। पहाड़ों से रोजगार और बेहतर शिक्षा की तलाश में युवाओं के लगातार बाहर जाने से पारिवारिक संरचनाएं बदलने लगी हैं। आज की आधुनिक जीवनशैली में अम्मा-बुबु का स्नेह और दुलार अब वीडियो कॉल के स्क्रीन तक सिमटकर रह गया है। 13 सितंबर को मनाए जाने वाले 'नेशनल ग्रैंडपैरेंट्स डे' के मौके पर यह कड़वी सच्चाई साफ नजर आती है कि बुजुर्गों की गोद में खेलने वाली पीढ़ी आज उनसे कोसों दूर शहरों और विदेश में बस चुकी है। नैनीताल निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी नारायण अपनी पत्नी के साथ अकेले रहते हैं। उनका बेटा चंडीगढ़ और बेटी कनाडा में रहती हैं। दोनों बच्चे अपने-अपने परिवार और जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं, ऐसे में उनका घर आना कम ही हो पाता है। कभी त्योहार या छुट्टियों में बच्चे घर आते हैं। नारायण बताते हैं कि पो...