नई दिल्ली, जून 25 -- सोपान जोशी, वरिष्ठ पत्रकार भारत करोड़ों आम विशेषज्ञों का देश है। आम के जिक्र से ही चेहरे खिल उठते हैं। कुछ कहने की तीव्र इच्छा जाग जाती है। जिसे आम खाना पसंद न हो, वह भी उस पर बात करता पाया जा सकता है। हमारे यहां कितने ही फल हैं। कितने ही तरह का खान-पान है, मगर आम की तरह किसी दूसरी चीज पर न इतनी बात होती है, और न इतना लेखन ही। नगर-नगर में आम पर उत्सव होते हैं। हर कहीं लेख छपते हैं और चर्चाएं होती हैं, अखबार-टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक। किसी दूसरे देश का किसी एक फल या पेड़ के साथ ऐसा संबंध नहीं है, जैसा हमारा आम के साथ है। केवल भारत ही नहीं, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में भी दीवानगी का ऐसा ही आलम रहता है। जिनके यहां आम का एक झाड़ न हो, वे भी आम के चक्कर में पड़ ही जाते हैं। छोटी कक्षाओं में निबंध लिखवाए ज...