रजनीश कुमार शुक्ल (पूर्व कुलपति एवं तुलनात्मक धर्म दर्शन के प्रोफेसर), जुलाई 7 -- अमरनाथ यात्रा हमें सिखाती है कि यदि परमात्मा से मिलना है, तो हमें अपने अहंकार, बाहरी चमक-दमक, विकारों, पारिवारिक मोह और यहां तक कि अपने भौतिक शरीर के अभिमान (पंच तत्व) को भी पीछे छोड़ना होगा, तभी आदिदेव शिव की प्राप्ति होगी। एक बार पार्वती ने महादेव से पूछा- 'हे प्राणनाथ! आप अजर-अमर हैं और मुझे बार-बार जन्म-मृत्यु के चक्र से गुजरना पड़ता है। ऐसा क्यों है? मुझे भी उस अमरत्व के मार्ग को जानना है। कृपा कर मुझे वह कथा सुनाइए, जिसे सुनकर जीव मृत्यु के भय से सदा के लिए मुक्त हो जाता है। शिव ने कहा कि वे यह कथा अवश्य सुनाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें एक सुरक्षित और एकांत स्थान पर जाना होगा।गुप्त स्थान की ओर प्रस्थान अमरता के रहस्य को पूर्णतः गोपनीय रखने के लिए शिव ने...