अररिया, जून 4 -- अररिया, वरीय संवाददाता प्रकृति के प्रति अपनी संवेदना को आंचलिकता के साथ चित्रण करने वाले अमर कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु सचमुच पर्यावरण प्रेमी थे। रेणु जी का पर्यावरण के प्रति गहरा लगाव था। यही कारण है कि रेणुजी के साहित्य में जल, पृथ्वी,पेड़ और पक्षी से जीवन के रिश्ते के विवरण भरेपड़ेहैं। अगस्त 1944 में फणीश्वरनाथ रेणु की लिखी पहली कहानी 'बट बाबा' पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। यह कहानी एक विशालकाय पेड़ पर केंद्रित है। सबसे बड़ी बात ये कि बट वृक्ष को रेणु जी ने 'बट बाबा' का दर्जा दिया है। कहानी में पेड़ पर बैठी पक्षियों की चहचहाहट व पेड़ के नीचे ग्रामीणों की बैठक का सुंदर उल्लेख मिलता है। यह भी पढ़ें- पर्यावरण को समर्पित कर दी जिंदगी ग्रामीणों द्वारा पेड़ को पूजने, राह चलते राहगीरों द्वारा मनोकामना पूर्ति के लिए मन्नत मांगना भी ...