नई दिल्ली, जनवरी 31 -- पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का मानना है कि देश की राजनीतिक प्रक्रिया वैचारिक पतन को दिखाती है, जहां पैसे की ताकत को उसके सभी रूपों में चुनावी नतीजों को बिगाड़ने की इजाजत दी है और उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने में नाकाम रहे हैं। अपनी नई किताब 'आर्गुएबली कंटेंशियस: थॉट्स ऑन ए डिवाइडेड वर्ल्ड' में अंसारी यह भी लिखते हैं, "हम अभी तक चुनावी गड़बड़ियों को खत्म करने में सफल नहीं हुए हैं। हमने पैसे की ताकत को उसके सभी रूपों में चुनावी नतीजों को बिगाड़ने की इजाजत दी है और उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने में नाकाम रहे हैं।" वह आगे कहते हैं, "आज हमें यह मानना होगा कि लोकतंत्र का गिलास आधा भरा हुआ है। हमने चुनावी लोकतंत्र का अभ्यास मशीनी तरीके से किया है, बिना इसे पूरी तरह से प्रतिनिधि बनाए।" अंसारी, जो लगातार दो ...
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