सहरसा, जनवरी 23 -- सहरसा, हिन्दुस्तान टीम। मखाना उद्योग स्थापना के बाद ही जिले के किसानों की तकदीर संवर सकेगी। यह इसलिए क्योंकि मखाना किसानों को खेत में उपजे गुर्री से लावा तैयार करने के लिए पूर्णिया या दरभंगा का रुख करना पड़ता है। अगर कोई किसान गुर्री को बेच देते तो उसका उचित दर नहीं मिल पाता है। इतना ही नहीं खेत तैयार करने के लिए मजदूरों की तलाश में भी भटकना पड़ता है। दरअसल, मजदूरों के परदेश पलायन की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजदूर की कमी हो गई है। जो मजदूर बच गए हैं वे अधिक मजदूरी दर की डिमांड करते हैं। किसानों का कहना है कि अगर जिले में मखाना उद्योग खुल जाए तो हमलोगों की तकदीर बदल जाएगी। सैकड़ों हाथ को रोजगार भी मिल जाएगा। अब अगर जिले में हो रही मखाना खेती पर नजर डाले तो इसका रकवा हर साल बढ़ते जा रहे हैं। रकवा की तरह किसानों की आमदन...