गंगापार, सितम्बर 21 -- अदालतों में मुकदमों के दशकों तक लंबित रहने के पीछे पुलिसिया तंत्र की कारस्तानी का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। ग्राम न्यायालय मेजा में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां मांडा पुलिस की भूमिका सीधे तौर पर अभियुक्त को न्यायालय में हाजिर होने से रोकने और विधिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की रही है। 28 साल पुराने एक मुकदमे में लगातार सम्मन, जमानतीय व गैर-जमानतीय वारंट दबाए रखने और न्यायालय वापसी पर भ्रामक आख्या लगाने पर न्यायाधिकारी सन्तोष कुमार वर्मा ने बेहद तल्ख रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में थाना प्रभारी मांडा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इसकी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस आयुक्त, प्रयागराज कमिश्नरेट को संदर्भित कर दी है। मामला मांडा थाने से जुड़े 28 वर्ष पुराने मुकदमे का है।

पुलिस की भूमिका पत्रावली ज...