कौशाम्बी, अप्रैल 6 -- नगर पंचायत सिराथू के मंझनपुर रोड स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को कथा वाचक संत राजेंद्र जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उपस्थित श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला बाल्यकाल में करते हुए लोगों को सुखी करने का काम किया है। यही कारण था कि समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की थी। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम म...