खगडि़या, अप्रैल 3 -- खगड़िया। हिन्दुस्तान संवाददाता अभिमान रहित भक्ति से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है। हनुमानजी ऐसी राम की भक्ति में लीन हो गए थे कि उन्हें अपने पद प्रतिष्ठा का तनिक भी अभिमान नहीं रह गया था। यह बातें गुरुवार को शहर में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा के दौरान परमपूज्य त्रिकालदर्शी परमसिद्ध विदेह संत श्री देवराहा शिवनाथ दास जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि काया गढ़ जीत जोगी तब हम जानी, ऐसी काया गढ़वा में धोबीन रानी। श्री हनुमानजी इसी काया के गढ़ को भगवान राम की भक्ति के माध्यम से जीत लिए थे। श्री हनुमान जी ऐसी राम की भक्ति में लीन हो गए थे कि उन्हें अपने पद प्रतिष्ठा का तनिक भी अभिमान नहीं रह गया था। संत श्री ने कहा कि श्री हनुमानजी को भगवान राम की भक्ति के आगे यहां तक भान नहीं था कि हम कौन हैं? इसी...