अररिया, नवम्बर 3 -- सादगी-पसंद और विचारधारा से जुड़े होते थे पहले नेता, अब सब खत्म फारबिसगंज, एक संवाददाता। 70 के दशक में होने वाले चुनावों में प्रत्याशियों की भीड़ नहीं होती थी। दो-तीन पार्टियां हुआ करती थीं। तीन चार प्रत्याशियों के बीच ही मुकाबला होता था। उस दौर के नेता सादगी, पसंद और विचारधारा से जुड़े होते थे। कार्यकर्ता भी विचारधारा के साथ जुड़े होते थे। पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक काम करते थे। कार्यकर्ताओं में उत्साह ऐसा रहता था कि भूखे-प्यासे गांव-गांव, टोला-टोला जाकर अपने प्रत्याशी का प्रचार करते थे। उस जमाने में आवागमन का उतना साधन नहीं था। लोगों के पास आज की तरह वाहनों की सुविधा भी नहीं होती थी। पैदल व साइकिल से कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी का चुनाव प्रचार करते थे। रात में जहां जगह मिलती थी, उसी गांव में रुक जाते थे। सुबह फिर चुनाव प्रच...
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